राजीव गांधी, भारत के सबसे युवा प्रधानमंत्री और आधुनिक भारत के विकास के प्रमुख चेहरों में से एक थे। उन्होंने 40 साल की उम्र में प्रधानमंत्री पद संभालकर देश को तकनीकी, औद्योगिक और शैक्षिक रूप से सशक्त बनाने का प्रयास किया। उनका जन्म 20 अगस्त 1944 को मुंबई में हुआ और वे पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और फिरोज गांधी के बड़े पुत्र थे।
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
राजीव गांधी का बचपन राजनीतिक माहौल में बीता, लेकिन वे राजनीति से दूर रहना चाहते थे।
उन्होंने देहरादून के प्रतिष्ठित दून स्कूल में पढ़ाई की।
बाद में इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय गए।
पायलट बनने के जुनून के कारण उन्होंने दिल्ली फ्लाइंग क्लब में प्रशिक्षण लिया और इंडियन एयरलाइंस में पायलट बने।
राजनीतिक जीवन की शुरुआत
1980 में अपने छोटे भाई संजय गांधी की असामयिक मृत्यु के बाद वे राजनीति में आए।
1981 में अमेठी से सांसद चुने गए और अपनी मां इंदिरा गांधी के करीबी सहयोगी बन गए।
1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री पद संभाला।
प्रधानमंत्री के रूप में योगदान
राजीव गांधी ने 1984 से 1989 तक भारत के प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया।
तकनीकी क्रांति:
उन्होंने भारत में कंप्यूटर और सूचना प्रौद्योगिकी का विस्तार किया।
पंचायती राज:
उन्होंने ग्रामीण स्वशासन को मजबूत करने के लिए पंचायती राज व्यवस्था को बढ़ावा दिया।
आर्थिक सुधार:
राजीव गांधी ने औद्योगिक लाइसेंसिंग प्रणाली को सरल बनाया।
शांति प्रयास:
श्रीलंका में तमिल संघर्ष को समाप्त करने के लिए उन्होंने भारत-श्रीलंका समझौता किया।
शिक्षा:
उन्होंने जवाहर नवोदय विद्यालय की स्थापना कर ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्ता शिक्षा का प्रावधान किया।
चुनौतियां और विवाद
1. बोफोर्स घोटाले का मुद्दा उनकी सरकार के लिए बड़ा विवाद बना।
2. श्रीलंका में भारतीय शांति सेना भेजने का निर्णय विवादित साबित हुआ।
व्यक्तित्व और विरासत
1. राजीव गांधी शांत स्वभाव और आधुनिक सोच के व्यक्ति थे।
2. उनके प्रयासों ने भारत को तकनीकी और आर्थिक रूप से आगे बढ़ने में मदद की।
3. उनकी मृत्यु के बाद उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
निधन और बलिदान
21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरंबुदूर में एक आत्मघाती बम हमले में राजीव गांधी की हत्या कर दी गई। उनकी शहादत ने देश को गहरा आघात पहुंचाया।
सीख
राजीव गांधी की कहानी हमें यह सिखाती है कि नई सोच और साहसिक फैसले देश को प्रगति के पथ पर ले जा सकते हैं। उनका जीवन तकनीकी और विकास के प्रति समर्पण का प्रतीक है।
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