मानवता की सच्ची सेवा - The True Service of Humanity by Mother Teresa

मानवता की सच्ची सेवा - The True Service of Humanity by Mother Teresa

मदर टेरेसा, जिनका असली नाम एग्नेस गोंक्सा बोयाजियू था, एक ऐसी महिला थीं जिनका जीवन समर्पण, दया और मानवता की सेवा में समर्पित था। उनका जन्म 26 अगस्त 1910 को अल्बानिया के स्कोप्जे में हुआ था, और बहुत कम उम्र से ही उन्होंने गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करने का निर्णय लिया था।

मदर टेरेसा ने 18 साल की उम्र में कैथोलिक नन बनने का निर्णय लिया और 1928 में भारत आकर कोलकाता में अपनी सेवा कार्य की शुरुआत की। उन्होंने "मिशनरी ऑफ चैरिटी" नामक संस्था की स्थापना की, जिसका मुख्य उद्देश्य गरीब, असहाय, बीमार और पीड़ित लोगों की मदद करना था। मदर टेरेसा ने जीवनभर उन लोगों की सेवा की जो समाज में उपेक्षित थे और जिन्हें किसी ने अपनी दया से नहीं देखा था।

उनकी सबसे बड़ी पहचान थी उनके द्वारा किए गए समाज सेवा के कार्य और उन लोगों के प्रति उनके गहरे प्रेम और सहानुभूति। वे उन गरीबों, बीमारों और कुष्ठ रोगियों के पास जातीं, जिनकी कोई मदद नहीं करता था, और उन्हें अपनी पूरी संवेदनशीलता और देखभाल से सहारा देतीं। मदर टेरेसा का यह विश्वास था कि "जो लोग सबसे कमज़ोर और सबसे गरीब हैं, वे ही भगवान का रूप होते हैं।"

उनकी दया और सेवा को दुनिया भर में सराहा गया और उन्हें 1979 में शांति का नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ। उन्होंने हमेशा अपने कामों के माध्यम से यह साबित किया कि समाज में सच्ची सेवा और प्रेम का मतलब केवल शब्दों से नहीं, बल्कि कामों से है। मदर टेरेसा ने कभी भी अपनी प्रतिष्ठा या पुरस्कारों का ध्यान नहीं रखा; उनका उद्देश्य केवल मानवता की सेवा करना था।

1985 में जब वे बीमार पड़ीं, तब भी उन्होंने अपना काम जारी रखा और समाज की सेवा में कभी भी कोई कमी नहीं की। 5 सितंबर 1997 को उनका निधन हुआ, लेकिन उनका जीवन आज भी लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

सीख:
मदर टेरेसा का जीवन हमें यह सिखाता है कि सेवा का वास्तविक अर्थ निस्वार्थ भाव से, बिना किसी स्वार्थ के, दूसरों की मदद करना है। उन्होंने यह साबित किया कि दया, प्यार और सहानुभूति की शक्ति से हम दुनिया को एक बेहतर जगह बना सकते हैं।

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